स्कन्द षष्ठी व्रत पर जरूर करें ये आरती, तभी पूरी मानी जाएगी पूजा

हिन्दू धर्म में स्कन्द षष्ठी का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े बेटे भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के सभी दुखों का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय मिलती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्कन्द षष्ठी (Skand Shashthi 2026) की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक कि अंत में उनकी भक्ति भाव के साथ आरती न की जाए, जो इस प्रकार है –

कार्तिकेय जी की आरती (Kartikeya ji ki Aarti)

जय जय आरती वेणु गोपाला
वेणु गोपाला वेणु लोला
पाप विदुरा नवनीत चोरा
जय जय आरती वेंकटरमणा
वेंकटरमणा संकटहरणा
सीता राम राधे श्याम
जय जय आरती गौरी मनोहर
गौरी मनोहर भवानी शंकर
सदाशिव उमा महेश्वर
जय जय आरती राज राजेश्वरि
राज राजेश्वरि त्रिपुरसुन्दरि
महा सरस्वती महा लक्ष्मी
महा काली महा लक्ष्मी
जय जय आरती आन्जनेय
आन्जनेय हनुमन्ता
जय जय आरति दत्तात्रेय
दत्तात्रेय त्रिमुर्ति अवतार
जय जय आरती सिद्धि विनायक
सिद्धि विनायक श्री गणेश
जय जय आरती सुब्रह्मण्य
सुब्रह्मण्य कार्तिकेय।

।।पूजन मंत्र।।
ऊं शारवाना-भावाया नमः
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा
देवसेना मनः कांता कार्तिकेया नामोस्तुते
ऊं सुब्रहमणयाया नमः

आरमुखा ओम मुरूगा
वेल वेल मुरूगा मुरूगा
वा वा मुरूगा मुरूगा
वादी वेल अज़्गा मुरूगा
अदियार एलाया मुरूगा
अज़्गा मुरूगा वरूवाई
वादी वेलुधने वरूवाई

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