भारत में स्ट्रीट फूड की बात हो और गरमा-गरम कचौड़ी का जिक्र न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। खस्ता कचौड़ी के साथ तीखी आलू की सब्जी या चटपटी चटनी का कॉम्बिनेशन किसी भी फूडी का दिन बनाने के लिए काफी है।
वैसे तो हमारे देश के हर कोने में आलू-प्याज से लेकर दाल और मावा तक, कई तरह की कचौड़ियां मिलती हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक शहर ऐसा भी है जिसे ‘कचौड़ी की राजधानी’ यानी Kachori Capital का रुतबा हासिल है?
पूर्वी राजस्थान का यह शहर है कचौड़ी का असली ठिकाना
जी हां, हम बात कर रहे हैं राजस्थान के पूर्वी हिस्से में बसे खूबसूरत शहर ‘भरतपुर’ की। इस शहर में सुबह की शुरुआत ही कचौड़ियों की भीनी-भीनी महक से होती है। भरतपुर के पुराने बाजारों में सुबह-सुबह दशकों पुरानी दुकानों के बाहर लोगों की भारी भीड़ नजर आ जाती है। यहां कचौड़ी सिर्फ एक स्नैक नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्वादिष्ट परंपरा है जिसके लिए लोग अपनी सुबह की नींद तक कुर्बान कर देते हैं।
स्वाद ऐसा कि हर कोई हो जाए दीवाना
भरतपुर का नाश्ता अपने आप में बहुत खास है। यहां कचौड़ियों की कई लाजवाब वैरायटी मिलती हैं, जिनमें ये चार सबसे ज्यादा मशहूर हैं:
आलू कचौड़ी: सुबह के नाश्ते के लिए स्थानीय लोगों का एक और सुपरहिट विकल्प।
कढ़ी कचौड़ी: यह यहां का एक बेहद खास स्वाद है, जिसमें कुरकुरी कचौड़ी को खट्टी-टैंगी कढ़ी के साथ परोसा जाता है।
दाल कचौड़ी: मसालेदार दाल की बेहतरीन स्टफिंग वाली खस्ता कचौड़ी।
प्याज कचौड़ी: प्याज और खास मसालों के चटपटे मिश्रण से तैयार।
एक परफेक्ट नाश्ते के लिए, इन कचौड़ियों को एकदम गरमा-गरम तीखे आलू की झोलदार सब्जी, हरी चटनी या इमली की खट्टी-मीठी चटनी के साथ सर्व किया जाता है।
चाय, जलेबी और कचौड़ी का मजेदार कॉम्बो
भरतपुर में कचौड़ी का लुत्फ उठाने के लिए किसी खास त्योहार का इंतजार नहीं किया जाता। रोज सुबह सड़क किनारे लगने वाले ठेले हों या मोहल्ले की हलवाई की दुकान, हर जगह कचौड़ी का ताजा बैच तलना शुरू हो जाता है।
नौकरीपेशा लोगों से लेकर छात्रों और परिवारों तक, हर कोई इसका आनंद लेने पहुंच जाता है। स्थानीय लोगों का सबसे पसंदीदा कॉम्बो है- गरमा-गरम कचौड़ी, साथ में कड़क मसाला चाय और आखिर में मुंह मीठा करने के लिए जलेबी।
आज भी कायम है पीढ़ियों पुरानी रेसिपी
इस शहर के नाश्ते का यह शानदार कल्चर सालों से बिल्कुल नहीं बदला है। आज भी कई दुकानें ऐसी हैं जिन्हें एक ही परिवार की कई पीढ़ियां मिलकर चला रही हैं और उनकी कचौड़ी का स्वाद आज भी पहले जैसा ही बरकरार है।
जी हां, दशकों से यहां के रेस्टोरेंट अपने ताजे और क्रिस्पी स्वाद से पर्यटकों और स्थानीय लोगों का दिल जीत रहे हैं। कचौड़ी के लिए इसी अटूट दीवानगी ने ही तो भरतपुर को ‘भारत की कचौड़ी राजधानी’ का यह खास मुकाम दिलाया है।



