बांग्लादेश इन दिनों गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में लंबे समय तक बिजली कटौती और लोड शेडिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं। बिजली की अनियमित आपूर्ति से आम लोगों के साथ-साथ कारोबार, खेती और शिक्षा पर भी असर पड़ रहा है। हाल के महीनों में बिजली संकट को लेकर कई जिलों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

बिजली संकट ने बढ़ाई लोगों की परेशानी
बांग्लादेश में लगातार बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ढाका के बाहर जिला शहरों और ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताई गई है। कई जगह घंटों बिजली नहीं रहने से घरों के साथ-साथ दुकानों, छोटे उद्योगों और दूसरे कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।
जुलाई में देश के कई जिलों में बिजली कटौती के खिलाफ सड़क जाम, प्रदर्शन और बिजली कार्यालयों के बाहर विरोध की घटनाएं सामने आई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, सतखीरा, चांदपुर, जमालपुर, टांगाइल, सिराजगंज और दूसरे इलाकों में लोगों ने बिजली संकट के खिलाफ आवाज उठाई।
आखिर क्यों पैदा हुआ पावर क्राइसिस?
बांग्लादेश के बिजली संकट के पीछे ईंधन और गैस की कमी, पावर प्लांट की तकनीकी समस्याएं और बिजली उत्पादन में बाधाएं प्रमुख कारणों में शामिल हैं। जून में दो पावर प्लांट बंद होने से करीब 3,000 मेगावाट क्षमता ग्रिड से बाहर हो गई थी, जिसके बाद कई इलाकों में लोड शेडिंग बढ़ गई।
इसके अलावा जुलाई में एक Floating Storage and Regasification Unit (FSRU) में तकनीकी खराबी के कारण गैस की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। इससे बिजली संयंत्रों के साथ उद्योगों और CNG स्टेशनों पर भी असर पड़ा।
ताजा रिपोर्टों में भी गैस की कमी और लगातार बिजली कटौती को लेकर बांग्लादेश सरकार द्वारा बिजली बचाने के उपाय तेज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
संकट में फिर क्यों याद आया भारत?
बांग्लादेश की ऊर्जा व्यवस्था में भारत पहले से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। दोनों देशों के बीच बिजली व्यापार के तहत भारत से बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति होती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत से बिजली आयात में Adani Power की आपूर्ति के अलावा Bheramara HVDC और Tripura के जरिए भी बिजली बांग्लादेश पहुंचती है।
यही वजह है कि जब घरेलू उत्पादन और ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ता है, तो भारत से मिलने वाली बिजली बांग्लादेश के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बन जाती है। हालांकि, मौजूदा संकट का समाधान सिर्फ आयात बढ़ाने से नहीं होगा। घरेलू गैस आपूर्ति, पावर प्लांट की उपलब्धता और ग्रिड व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
नेपाल से भी मिल रही है बिजली
बांग्लादेश ने ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग का दायरा भी बढ़ाया है। नेपाल से 40 मेगावाट बिजली भारत के रास्ते बांग्लादेश पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। यह सप्लाई पांच महीने तक जारी रहने की योजना है।
हालांकि 40 मेगावाट बांग्लादेश की कुल जरूरत की तुलना में बहुत कम है, लेकिन यह भारत-नेपाल-बांग्लादेश के बीच क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
आगे क्या होगा?
बांग्लादेश की बिजली समस्या का स्थायी समाधान उसके ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने पर निर्भर करेगा। देश का पहला परमाणु बिजली संयंत्र रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट भी अगस्त के अंत तक करीब 300 मेगावाट बिजली ग्रिड में देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
फिलहाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिजली कटौती को कम करना और लोगों का भरोसा वापस हासिल करना है। लगातार बिजली संकट से अगर विरोध और असंतोष बढ़ता है, तो यह केवल ऊर्जा का नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक दबाव का भी मुद्दा बन सकता है।
निष्कर्ष
बांग्लादेश का मौजूदा पावर क्राइसिस कई वजहों का नतीजा है, जिसमें गैस की कमी, पावर प्लांट में तकनीकी दिक्कतें और ईंधन आपूर्ति में बाधाएं शामिल हैं। भारत से बिजली आयात बांग्लादेश को तत्काल राहत देने में मदद कर सकता है, लेकिन लंबे समय के लिए घरेलू उत्पादन और ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी होगा।


