अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गोवा दौरे की शुरुआत कांग्रेस के लिए बड़े झटके के साथ हुई। खरगे के साथ होने वाली बैठक से ठीक पहले कम से कम 100 बूथ-स्तरीय एजेंटों और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया। इन सभी बीएलए ने अपने इस फैसले की जानकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी सौंप दी है।
वाल्पोई के पार्ट 8 से कांग्रेस के बीएलए एशले पिन्हो ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैं एक बीएलए था और मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र से इस्तीफा दे दिया है।
मुझे नहीं लगता कि कांग्रेस 2027 में सरकार बनाने को लेकर गंभीर है। हमें विश्वास में नहीं लिया गया और मौजूदा समय में मुझे यह भी नहीं पता कि वाल्पोई में पार्टी का प्रमुख कौन है। पिन्हो ने आरोप भी लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी वाल्पोई का दौरा करने तक को तैयार नहीं हैं।
बैठक के उद्देश्य से अंजान थे कार्यकर्ता
कई बीएलए ने यह भी कहा कि उन्हें मल्लिकार्जुन खरगे की इस बैठक के मुख्य उद्देश्य की कोई जानकारी ही नहीं दी गई थी। एक कार्यकर्ता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हमने पार्टी नहीं छोड़ी है क्योंकि हम निष्ठावान कांग्रेसी हैं, लेकिन पार्टी में जिस तरह से काम चल रहा है, वह बेहद निराशाजनक है।
एक तरफ जहां पार्टी के भीतर असंतोष दिखा, वहीं दूसरी तरफ डाबोलिम हवाई अड्डे से बाहर निकलते समय भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने खरगे के काफिले को रोकने की कोशिश की।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस का मनोबल गिराने की हर मुमकिन कोशिश की है। जब से खरगे जी के दौरे का ऐलान हुआ है, तब से ही भाजपा में भारी बौखलाहट देखने को मिल रही है।


