उत्तर प्रदेशराज्य

UP में रोजवेज बस का किराया बढ़ाने की तैयारी, वित्त नियंत्रक ने शासन को भेजा प्रस्ताव

उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। आलम यह है कि रोडवेज अपने फिक्स डिपाजिट तुड़वाकर कर्मियों को वेतन बांट रहा है। वित्त नियंत्रक ने शासन को भेजे पत्र में 25 पैसा प्रति किलोमीटर प्रति यात्री बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। यह भी कहा है कि किराया तत्काल नहीं बढ़ाया गया तो राजकोषीय घाटा और बढ़ेगा और परिवहन निगम की आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी। अप्रैल से दिसंबर 2022 तक रोडवेज का नुकसान 210 करोड़ था और मार्च तक बढ़कर 250 करोड़ पहुंच जाने की संभावना जताई है।

रोडवेज बस का सफर महंगा होने जा रहा है। साल 2020 के बाद अब साल 2023 में किराया बढ़ेगा। इस बार किराया 25 पैसे प्रति किलोमीटर प्रति यात्री की दर से बढ़ाने की तैयारी है। इससे यात्रियों को 100 किलोमीटर तक बस सफर करने पर करीब 25 रुपये ज्यादा किराया देना पड़ेगा। वर्तमान में साधारण बस का किराया एक रुपये पांच पैसा प्रति किमी. प्रति यात्री है। जोकि बढ़कर अब एक रुपये 30 पैसा प्रति किमी. प्रति यात्री हो जाएगा। शासन को भेजे गए किराया बढ़ोत्तरी के पत्र मंजूरी मिलने पर बोर्ड में प्रस्ताव पास कराकर बढ़ा हुआ किराया लागू किया जाएगा। 

पांच शहरों के बीच साधारण बस किराया का इतना महंगा हो जाएगा

लखनऊ से कानपुर-22 रुपये
लखनऊ से प्रयागराज-52 रुपये
लखनऊ से गोरखपुर-65 रुपये
लखनऊ से बनारस-73 रुपये
लखनऊ से दिल्ली-125 रुपये
 
किराया बढ़ाने की वजह 

-डीजल की कीमत 65 रुपये से बढ़कर 90 रुपये प्रति लीटर होना
-स्पेयर पाटर्स में टायर, ट्यूब, बैटरी की कीमत 30 फीसदी बढ़ना
-पुरानी बसों की मरम्मत में खर्च ज्यादा होने से नई बसें खरीदना

साल दर साल यात्रियों पर बढ़ता रहा किराये का बोझ
बीते 10 साल से बस यात्रियों पर किराये का बोझ साल दर साल बढ़ता रहा। जिसमें साल 2012 में चार पैसा प्रति किलोमीटर प्रति यात्री किराया बढ़ा था। इसी प्रकार 2013 में भी चार पैसा, 2014 में पांच पैसा, 2016 में सात पैसा, 2017 में नौ पैसा और 2020 में दस पैसा अब 2023 में 25 पैसा प्रति यात्री प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाने की तैयारी है। 

परिवहन निगम एमडी संजय कुमार ने बताया कि यात्रियों को बेहतर बस सेवा देने के मकसद से किराया बढ़ाने पर विचार चल रहा है। ईधन, पार्ट्स और टोल की दरें लगातार बढ़ रही हैं। इससे रोडवेज आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। मंथन किया जा रहा है। दो वर्ष से किराया नहीं बढ़ा जबकि ईधन, आटो पार्ट्स कीमतें काफी बढ़ गई हैं। किराया वृद्धि का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।

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