क्या होता Mutual Fund NFO? इसमें निवेश करना कितना जोखिम भरा

म्यूचुअल फंड एनएफओ (Mutual Fund NFO) एक नई स्कीम है जो म्यूचुअल फंड कंपनी निवेशकों के लिए पहली बार लॉन्च करती है। यह एक नया म्यूचुअल फंड प्लान है जिसमें लोग शुरुआती फेज में पैसा लगा सकते हैं। एनएफओ के दौरान फंड हाउस निवेशकों से पैसा इकट्ठा करता है और उसे शेयर बाजार या अन्य एसेट्स में निवेश किया जाता है। एनएफओ में जोखिम भी होता है।

म्यूचुअल फंड न्यू फंड ऑफर (Mutual Fund NFO) एक ऐसी स्कीम है, जिसे म्यूचुअल फंड कंपनी पहली बार निवेशकों के लिए लॉन्च करती है। आसान भाषा में कहें तो यह एक नया म्यूचुअल फंड प्लान होता है, जिसमें लोग शुरुआती फेज में पैसा लगा सकते हैं। एनएफओ के दौरान फंड हाउस एक नई निवेश योजना पेश करता है, जिसमें निवेशकों से पैसा इकट्ठा किया जाता है, और फिर उस पैसे को शेयर बाजार, बॉन्ड्स या अन्य एसेट्स में निवेश किया जाता है।

एनएफओ आमतौर पर एक तय समय के लिए खुलता है, जैसे 10-15 दिन, और इस दौरान निवेशक इसमें यूनिट्स खरीद सकते हैं, ज्यादातर 10 रुपये प्रति यूनिट की कीमत पर।

IPO से क्या है समानता
एनएफओ को इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जैसा माना जाता है, क्योंकि दोनों में कुछ समानताएं हैं। जैसे आईपीओ में कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक को बेचती है, वैसे ही एनएफओ में म्यूचुअल फंड कंपनी पहली बार अपनी नई स्कीम निवेशकों को ऑफर करती है।

दोनों ही मामलों में शुरुआती कीमत आमतौर पर कम होती है (आईपीओ में फेस वैल्यू और एनएफओ में 10 रुपये प्रति यूनिट)। इसके अलावा, दोनों में निवेशकों को शुरुआती दौर में शामिल होने का मौका मिलता है, जिससे कई लोग इसे आकर्षक मानते हैं।

पर ये होता है फर्क
हालांकि, एनएफओ और आईपीओ में बड़ा अंतर यह है कि आईपीओ में आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, जबकि एनएफओ में आप एक फंड में निवेश करते हैं, जो आपके पैसे को कई जगहों पर लगाता है। एनएफओ में निवेश का एक फायदा यह है कि यह आपको नई इंवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी या थीम में शुरुआत से हिस्सा लेने का मौका देता है।

मिसाल के तौर पर, अगर कोई फंड हाउस टेक्नोलॉजी या ग्रीन एनर्जी जैसे नए सेक्टर पर फोकस वाली स्कीम लॉन्च करता है, तो एनएफओ के जरिए आप उस थीम में जल्दी निवेश कर सकते हैं।

एनएफओ में क्या होता है जोखिम
हालांकि एनएफओ में जोखिम भी है। क्योंकि यह एक नया फंड होता है, इसका कोई पुराना परफॉर्मेंस रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे यह अनुमान लगाना मुश्किल होता है कि फंड भविष्य में कैसा प्रदर्शन करेगा। आईपीओ की तरह एनएफओ में भी शुरुआती उत्साह और मार्केटिंग का जोर रहता है।

फंड हाउस इसे आकर्षक दिखाने के लिए खूब प्रमोट करते हैं, जिससे निवेशक आकर्षित होते हैं। लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एनएफओ में निवेश से पहले उसकी रणनीति, फंड मैनेजर की काबिलियत और मार्केट की स्थिति को अच्छे से समझ लें।

पुराने फंड्स भी अच्छा ऑप्शन
कई बार पुराने फंड्स, जिनका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा हो, एनएफओ से बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कुल मिलाकर, एनएफओ और आईपीओ दोनों ही निवेश के नए मौके पेश करते हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी होता है। एनएफओ में निवेश करने से पहले अपनी जरूरतों, जोखिम लेने की क्षमता और फंड की रणनीति को ध्यान में रखना चाहिए।

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