आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। आयोग ने वेतन, भत्तों और नौकरी से जुड़े मुद्दों पर सुझाव देने के लिए 18 सवालों का डॉक्यूमेंट (8th Pay Commission Questionnaire) जारी किया है।
पहले इसकी आखिरी तारीख 16 मार्च 2026 थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर (8th Pay Commission Deadline Extended) दिया गया है। लेकिन इसी बीच रेलवे के एक बड़े कर्मचारी संगठन ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कई नई मांगें रख दी हैं।
रंजना प्रकाश देसाई को लिखा पत्र
इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA Demands 8th Pay Commission) ने आयोग की चेयरपर्सन रंजना देसाई को पत्र लिखकर कहा है कि मौजूदा प्रश्नावली अधूरी है और इसमें सैलरी, पेंशन और भत्तों से जुड़े कई अहम मुद्दे शामिल नहीं किए गए हैं।
क्या है संगठन की सबसे बड़ी मांग?
सबसे बड़ी मांग कर्मचारियों के वर्गीकरण (classification of employees) को लेकर उठाई गई है। अभी सरकारी कर्मचारियों को ग्रुप A, B और C में बांटा जाता है, लेकिन संगठन का कहना है कि समय के साथ काम, जिम्मेदारियां और टेक्नोलॉजी काफी बदल चुकी है। ऐसे में नए ढांचे की जरूरत है, ताकि सैलरी और प्रमोशन सही तरीके से तय हो सकें।
संगठन ने भत्तों पर भी साधा निशाना
भत्तों के मुद्दे पर भी संगठन ने सीधा निशाना साधा है। 7वें वेतन आयोग में 196 भत्तों पर चर्चा हुई थी, लेकिन आठवें आयोग की थीम में सिर्फ 12 कैटेगरी रखी गई हैं। IRTSA का कहना है कि हर भत्ता अलग जरूरत के लिए होता है, इसलिए सभी भत्तों को विस्तार से शामिल करना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों को सही लाभ मिल सके।
पेंशन और फैमिली पेंशन पर भी सवाल
पेंशन और परिवार पेंशन को लेकर भी बड़ा सवाल उठाया गया है। संगठन के मुताबिक, आयोग की मौजूदा प्रश्नावली में पेंशन से जुड़े मुद्दों का स्पष्ट जिक्र ही नहीं है। यह एक गंभीर कमी है, क्योंकि लाखों रिटायर्ड कर्मचारी और उनके परिवार इससे सीधे प्रभावित होते हैं।
कैटेगरी के लिए अलग प्रावधान की मांग
इसके अलावा अलग-अलग पदों के कर्मचारियों की समस्याओं को अलग से रखने की मांग भी की गई है। जैसे जूनियर इंजीनियर, सीनियर सेक्शन इंजीनियर और आईटी स्टाफ जैसी कैटेगरी के लिए अलग प्रावधान होना चाहिए।
करोड़ों कर्मचारियों-पेंशनर्स पर असर
कैरियर ग्रोथ को लेकर भी संगठन ने कहा है कि सिर्फ MACP स्कीम पर फोकस करना काफी नहीं है। असली जरूरत फंक्शनल प्रमोशन को बढ़ावा देने की है, जिससे कर्मचारियों की सैलरी और पद दोनों में सुधार हो।
IRTSA ने यह भी मांग की है कि कर्मचारी अपने पक्ष में कोर्ट के फैसले भी जमा कर सकें, साथ ही ऑनलाइन फॉर्म में कैरेक्टर लिमिट बढ़ाई जाए और फिजिकल तरीके से भी सुझाव देने की अनुमति दी जाए।
यानी यह साफ है कि आठवें वेतन आयोग पर अब सैलरी, पेंशन और भत्तों को लेकर दबाव बढ़ता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स की जेब पर कितना असर पड़ेगा।


