‘मैं खाना खा लूं तो क्या बदल जाएगा?’ सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने से किया इनकार, हाई कोर्ट में हुई सुनवाई

लद्दाख के पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने जारी अनशन को समाप्त करने से साफ इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वे इस समय अनशन खत्म कर देते हैं, तो इससे सरकार को यह संदेश जाएगा कि उनका आंदोलन गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत विरोध नहीं, बल्कि लद्दाख के लोगों की मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है।


क्या है पूरा मामला?

सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े संवैधानिक, पर्यावरणीय और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत संरक्षण, स्थानीय लोगों के अधिकारों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं।

इन्हीं मांगों के समर्थन में उन्होंने अनशन शुरू किया, जो अब लंबे समय से जारी है।


हाई कोर्ट में क्या हुआ?

अनशन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत में सोनम वांगचुक का पक्ष रखा गया। इस दौरान उन्होंने कहा—

“मैं खाना खा लूं तो क्या बदल जाएगा? अगर मैं अनशन खत्म कर दूं, तो सरकार यही समझेगी कि हमारा आंदोलन गंभीर नहीं था।”

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लंबे समय तक भोजन न करने की वजह से उनके शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो गई हैं, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में उनके अन्य महत्वपूर्ण अंग सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।


स्वास्थ्य को लेकर क्या कहा?

सोनम वांगचुक ने बताया कि लगातार अनशन का असर उनके शरीर पर पड़ा है। उन्होंने कहा—

  • मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो रही है।
  • वजन में भी कमी आई है।
  • डॉक्टर नियमित रूप से स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं।
  • फिलहाल शरीर के अन्य प्रमुख अंग सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक अनशन शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, इसलिए नियमित चिकित्सकीय निगरानी बेहद जरूरी होती है।


आंदोलन की मुख्य मांगें

सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों की प्रमुख मांगें हैं—

  • लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण।
  • पर्यावरण और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा।
  • स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर।
  • भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदाय के अधिकार।
  • क्षेत्र की सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय पहचान की रक्षा।

सरकार की प्रतिक्रिया

अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस मामले पर समय-समय पर बातचीत और समाधान के प्रयासों की बात कही गई है। हालांकि, वांगचुक और आंदोलनकारी संगठन मांगों पर ठोस निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं। मामले से जुड़ी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे भी जारी रहने की संभावना है।


क्यों चर्चा में है यह आंदोलन?

सोनम वांगचुक का आंदोलन केवल लद्दाख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन और विरोध में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।


आगे क्या होगा?

हाई कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई और सरकार तथा आंदोलनकारियों के बीच संभावित वार्ता पर सभी की नजर बनी हुई है। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो समाधान का रास्ता निकल सकता है, वहीं अनशन जारी रहने की स्थिति में स्वास्थ्य और कानूनी दोनों पहलू महत्वपूर्ण बने रहेंगे।


निष्कर्ष

सोनम वांगचुक ने साफ कर दिया है कि बिना ठोस आश्वासन के वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य लद्दाख के लोगों की आवाज़ को सरकार तक पहुंचाना है। दूसरी ओर, उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। अब इस पूरे मामले में अदालत की आगामी सुनवाई और सरकार की पहल अहम भूमिका निभा सकती है।

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