India Weather Update: 18 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, यूपी में बारिश ने मचाई तबाही; 81 मौतों से हड़कंप

देश के कई हिस्सों में सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी हिस्सों तक कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी और बाढ़ जैसे हालात देखने को मिल रहे हैं। सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में दिखाई दिया है, जहां 25 से 27 सितंबर के बीच हुई लगातार बारिश और तूफान से बड़ी संख्या में जनहानि और संपत्ति को नुकसान हुआ है। शुरुआती सरकारी आंकड़ों में 56 मौतें दर्ज की गई थीं, जबकि बाद में तीन दिनों का कुल आंकड़ा 81 तक पहुंच गया।

18 राज्यों में बारिश और तूफान का अलर्ट

इससे पहले सितंबर में मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी बारिश और तूफान की चेतावनी जारी की थी। कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई थी।

मौसम में यह बदलाव अलग-अलग मौसमी प्रणालियों के कारण हुआ है। हालिया दौर में उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे लगे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बने डिप्रेशन ने उत्तर भारत में बारिश को बढ़ाया। IMD के मुताबिक इसका प्रभाव उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिला।

यूपी में 48 घंटे में 56 लोगों की मौत

उत्तर प्रदेश में 25 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह तक भारी बारिश और तूफान से 56 लोगों की मौत और 46 लोगों के घायल होने की शुरुआती जानकारी सामने आई थी। इस दौरान राज्य के 75 में से 56 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

बारिश के कारण 1,021 से ज्यादा मकानों को नुकसान पहुंचा और 107 पशुओं की भी मौत हुई। राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक आंकड़ों का संकलन जारी था, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना भी जताई गई थी।

बाद में बढ़ा मौतों का आंकड़ा

बाद की रिपोर्ट में 25 से 27 सितंबर के पूरे तीन दिनों का आंकड़ा सामने आने पर यूपी में बारिश और तूफान से 81 लोगों की मौत और 62 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई। इस अवधि में 2,254 से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचा और 107 पशुओं की मौत की रिपोर्ट हुई।

इससे साफ है कि शुरुआती 56 मौतों का आंकड़ा अंतिम तीन-दिवसीय आंकड़ा नहीं था, बल्कि बाद में राहत और जिला स्तर से आंकड़े जुड़ने के साथ संख्या बढ़ी।

सीतापुर समेत कई जिले सबसे ज्यादा प्रभावित

शुरुआती आंकड़ों में सीतापुर में सबसे ज्यादा 7 मौतें दर्ज की गई थीं। इसके बाद लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में 5-5 मौतें हुईं। अयोध्या और गोरखपुर में 4-4 मौतें दर्ज की गईं।

कई जिलों में घरों में पानी भर गया, सड़कें जलमग्न हो गईं और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। भारी बारिश के कारण फसलों को भी नुकसान पहुंचा है और प्रशासन की ओर से राहत-बचाव अभियान चलाया गया।

सामान्य से कई गुना ज्यादा हुई बारिश

उत्तर प्रदेश में बारिश की स्थिति कितनी असामान्य रही, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 25 से 27 सितंबर के दौरान राज्य में 111.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत करीब 9.4 मिमी बताया गया। यानी बारिश सामान्य से कई गुना ज्यादा रही।

फर्रुखाबाद, कन्नौज, शाहजहांपुर, हमीरपुर और महोबा जैसे जिलों में सामान्य की तुलना में बारिश में बेहद बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुछ इलाकों में कुछ ही घंटों में अत्यधिक बारिश हुई।

घाघरा और राप्ती नदियों से बढ़ा खतरा

लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर भी बढ़ा है। घाघरा और राप्ती के कुछ निगरानी केंद्रों पर जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया। ऐसे में नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई।

बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में आवागमन, बिजली आपूर्ति और खेती से जुड़ी गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।

अब यूपी में कैसा रहेगा मौसम?

IMD की 26 सितंबर की चेतावनी के मुताबिक पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश का खतरा था। 27 सितंबर को पूर्वी यूपी में भारी बारिश और पश्चिमी यूपी में बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। साथ ही गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना भी जताई गई थी।

हालांकि IMD के उसी पूर्वानुमान में 28 सितंबर के बाद यूपी के लिए इन श्रेणियों में कोई चेतावनी नहीं दी गई थी। इसका मतलब है कि बारिश का सबसे गंभीर दौर धीरे-धीरे कमजोर होने की उम्मीद थी, हालांकि स्थानीय स्तर पर जलभराव और नदियों के बढ़े जलस्तर का असर बना रह सकता है।

लोगों को सतर्क रहने की सलाह

भारी बारिश और आंधी के दौरान लोगों को जलभराव वाली सड़कों, कमजोर इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान या ऊंचे स्थानों पर जाने से बचना जरूरी है।

नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। बारिश के कारण बंद या क्षतिग्रस्त सड़कों पर अनावश्यक यात्रा से भी बचना बेहतर है।

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