देशभर में आज 8 नवंबर 2026 को दीपावली का पावन पर्व पूरे उत्साह, उमंग और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। रोशनी और खुशियों का यह त्योहार हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। दिवाली के दिन घरों को दीपों, रंगोली और आकर्षक सजावट से सजाया जाता है। शाम होते ही लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं और परिवार के साथ मिलकर माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, सुंदर तथा रोशनी से जगमगाते घरों में निवास करती हैं।
मान्यता है कि दीपावली पर शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने से घर में सुख-शांति, धन, वैभव और समृद्धि का आगमन होता है। यही वजह है कि इस दिन पूजा के लिए शुभ समय का विशेष ध्यान रखा जाता है। खासतौर पर प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की आराधना करना बेहद शुभ माना जाता है। अगर आप भी आज दिवाली की पूजा करने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, प्रदोष काल का समय और मां लक्ष्मी के प्रभावशाली मंत्र।
दिवाली 2026: जानिए लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए शाम का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है।
पंचांग के मुताबिक, इस बार लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर शाम 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए कुल 1 घंटे 56 मिनट का समय मिलेगा। इस दौरान श्रद्धालु पूरे विधि-विधान और श्रद्धाभाव के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में की गई पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।
दिवाली 2026: प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का महत्व
दिवाली के दिन प्रदोष काल को लक्ष्मी पूजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद शुरू होने वाले इस समय में देवी लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
इसके अलावा इस बार वृषभ काल भी लक्ष्मी पूजा के शुभ मुहूर्त के साथ पड़ रहा है। वृषभ काल शाम 5 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में वृषभ लग्न को स्थिर लग्न कहा जाता है।
ऐसी मान्यता है कि स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन और सुख-समृद्धि का स्थायित्व बना रहता है। यही वजह है कि दिवाली पर प्रदोष काल और वृषभ लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है।
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का जाप
दिवाली के दिन पूजा के दौरान मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मंत्रों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण करने से मन को शांति मिलती है और भक्त का ध्यान पूजा में केंद्रित रहता है।
1. लक्ष्मी बीज मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥
2. महालक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः॥
3. लक्ष्मी गायत्री मंत्र
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
महालक्ष्मी पूजा के लिए इन मंत्रों का भी करें जाप
दीपावली की पूजा के दौरान कुछ विशेष महालक्ष्मी मंत्रों का जाप भी किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इन मंत्रों का उच्चारण कर सकते हैं।
- ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
- महालक्ष्मी नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् सुरेश्वरि। हरिप्रिये नमस्तुभ्यम्, नमस्तुभ्यम् दयानिधे।।
- पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे। सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं।।
दिवाली पर पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

दीपावली के दिन पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा स्थल पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। दीपक जलाएं, फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद विधिपूर्वक मंत्रों का जाप करें और माता लक्ष्मी की आरती करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। हालांकि, पूजा करते समय शुभ मुहूर्त और अपनी पारिवारिक परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय धारणाओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अमर राष्ट्र इन मान्यताओं की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। पूजा के समय और मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

