उत्तराखंड

भारत के इस चेहरे को देखकर पाक न सिर्फ थर्र-थर्र कांप रहा है, जानिए क्‍या कहते पूर्व सैन्‍य अफसर

ले. जनरल एमएस भंडारी (रिटा.) का कहना है कि सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहूंगा कि यह नए दौर का भारत है, जो जितना शालीन है, उतना ही आक्रामक भी। यही बात है कि भारत में लगातार घुसपैठ और आतंकी हमलों के बाद जब पानी सिर से ऊपर चला गया तो पाक को उसी अंदाज में जवाब दे दिया गया।

उन्‍होंने कहा कि पुलवामा हमले का जब भारत ने एयर स्ट्राइक कर जैश-ए-मुहम्मद के अड्डों को धूल में मिलाया तो पूरी दुनिया ने इस रूप को देखा। यह पाकिस्तान के साथ पूरी दुनिया के लिए भी संदेश था कि अब हमारा देश बदल चुका है। भारत के इस चेहरे को देखकर पाकिस्तान न सिर्फ थर्र-थर्र कांप रहा है, बल्कि उसकी स्थिति बदहवाश जैसी हो रखी है।

पाकिस्तान को जब हमने 1971 के युद्ध में धूल चटाकर अलग देश बांग्लादेश का गठन कराया तो आतंकियों का पनाहगार यह देश समझ गया कि हमसे पारंपरिक युद्ध में जीत पाना कभी संभव नहीं होगा। इसके बाद पाकिस्तान ने घुसपैठ करने की ओछी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया। 

पाक की हरकतों के कारण की कारगलि वार हुई और इस दफा भी पाक को हमने घुटनों के बल ला खड़ा कर दिया। हालांकि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और आतंकी वारदातें करता रहा। तब से अब तक हमारे जांबाज शहीद होते रहे और यह घुसपैठ तेज होती चली गई।

हालांकि, पुलवामा अटैक के बाद भारत के सब्र का पैमाना छलक उठा और एयर स्ट्राइक कर हमने बता दिया कि न सिर्फ पाक अधिकृत क्षेत्र, बल्कि जरूरत पड़ने पर चुटकियों में लाहौर को भी निशाना बनाया जा सकता है। इस एयर स्ट्राइक में एक बात गौर करने वाली यह भी है कि जिस बालाकोट में भारतीय सेना के मिराज विमान गरजे, वह पीओके के पश्चिम में है और सीमा के करीब है। यहां तक वायु सेना के विमानों की कार्रवाई कर वापस लौट जाना बताता है कि हमारी रणनीति कितनी बेहतर हो चुकी है।

पाकिस्तान पर दोहरी मार तब पड़ी जब अमेरिका ने भारत की कार्रवाई का साथ दिया और पाकिस्तान को स्पष्ट कह दिया कि उसे अपनी जमीन पर से आतंक को मिटाना होगा। पाकिस्तान तब और हतोत्साहित हो गया, जब चीन भी भारत के पक्ष में आकर खड़ा हो गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने इस माहौल से पाकिस्तान दोतरफा दबाव में है और हमारे इरादे और स्पष्ट हो चुके हैं। अब पाकिस्तान के बाद सिर्फ यही चारा बचा है कि वह या तो स्वयं अपने वतन से आतंक को बाहर निकाल फेंके या फिर उसकी कीमत भुगतने को तैयार रहे।

कूटनीति और समरनीति का विश्व में बजा डंका

वर्तमान परिस्थिति भारतीय कूटनीति और समरनीति के प्रभावी मिलन का प्रतीक है। यही वजह है कि भारत व पाकिस्तान के बीच उपजे तनाव के बीच अमेरिका, सऊदी अरब, चीन जैसे दोस्त भी पाकिस्तान के साथ खड़े नहीं हैं। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (सेनि.) डॉ. अनिल शर्मा इसके लिए भारतीय सेना व वायु सेना की पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक व सफल कार्रवाई को श्रेय देते हैं।

कश्मीर व राजस्थान में पाक सीमा पर सालों तक सेवाएं दे चुके ब्रिगेडियर (सेनि.) डॉ. अनिल शर्मा ने कहा कि पाकिस्तानी सेना, भारतीय सेना के सामने कहीं खड़ी नहीं होती है। पाकिस्तान सीमा में घुसकर भारतीय लड़ाकू विमानों की एयर स्टाइक से बौखलाए पाकिस्तान ने दोगुनी ताकत से भारतीय वायु सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की, मगर मुस्तैद भारतीय लड़ाकू विमानों ने उन्हें खदेड़ दिया और पाकिस्तान का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराया।

डॉ. शर्मा कहते हैं कि यदि किसी भी देश की सेना खुद को साबित करती है तो जाहिर तौर पर उस देश की विश्व पटल में साख बढ़ती है। अन्य शत्रु देश भी उसके सामने झुकने को मजबूत होते हैं। भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया है। भारत ने इस आक्रामक कार्रवाई से चीन जैसे विरोधी देश को भी साफ संदेश देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि देश अब नवीन ऊर्जा एवं भविष्यदृष्टि के साथ आगे बढ़ रहा है। उसने अपनी कूटनीति और समरनीति का डंका तो बजा ही दिया है।भारत को मौजूद आक्रामक नीति नहीं छोड़नी चाहिए। अपने हितों की रक्षा करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहना चाहिए।

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