Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, IT Stocks में मचा हाहाकार; Sensex-Nifty भी दबाव में

भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 9 सितंबर 2026 को भारी बिकवाली देखने को मिली। खासतौर पर आईटी सेक्टर के शेयरों में तेज गिरावट ने बाजार का माहौल बिगाड़ दिया। शुरुआती कारोबार में Nifty IT इंडेक्स करीब 3% नीचे चला गया, जबकि Sensex और Nifty 50 में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

आईटी शेयरों में गिरावट का असर बाजार के प्रमुख इंडेक्स पर भी दिखाई दिया। कारोबार के दौरान Sensex 600 अंक से ज्यादा फिसलकर करीब 74,969 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि Nifty 50 23,500 के नीचे चला गया। इससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी और बाजार में व्यापक बिकवाली का दबाव देखने को मिला।

IT Stocks में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

आईटी सेक्टर में गिरावट के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण भारतीय आईटी कंपनियों के लिए मांग और खर्च का आउटलुक प्रभावित होने की आशंका बनी है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और वैश्विक बाजारों में कमजोर सेंटीमेंट ने भी टेक शेयरों पर दबाव बढ़ाया।

आज शुरुआती कारोबार में HCL Technologies, Infosys, Tech Mahindra और TCS जैसे बड़े आईटी शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। वहीं Coforge में कंपनी के चेयरमैन के इस्तीफे से जुड़ी खबर के बाद दबाव और ज्यादा नजर आया।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी बढ़ाई चिंता

बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Brent crude करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकता है।

इसके अलावा रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा पर असर डाला है। ऐसे वैश्विक संकेतों के बीच निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते दिखाई दे रहे हैं।

Infosys-TCS समेत कई दिग्गज शेयर लाल निशान में

आईटी इंडेक्स में गिरावट व्यापक रही। शुरुआती कारोबार में HCL Tech करीब 3.67%, Infosys 3.50%, Tech Mahindra 3.43% और TCS 2.88% तक नीचे रहे। Nifty IT करीब 3% गिरकर प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा।

इस गिरावट से आईटी कंपनियों के निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब अमेरिकी ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

शेयर बाजार में इस तरह की तेज गिरावट के दौरान निवेशकों के लिए घबराहट में फैसला लेने के बजाय बाजार के मूलभूत संकेतों और संबंधित कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होता है। खासकर आईटी कंपनियों के मामले में अमेरिकी मांग, ब्याज दरों और टेक्नोलॉजी सेक्टर में हो रहे बदलाव अहम फैक्टर रहेंगे।

फिलहाल बाजार में वोलैटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव बढ़ा हुआ है और आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

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