
पित्तरों की कृपा प्राप्त करने के लिए पितृ पक्ष को उत्तम माना जाता है। इस दौरान पितरों का तर्पण श्राद्ध कर्म और पिंडदान किया जाता है। पितृ पक्ष में पितरों की तस्वीर लगाई जाती है। ऐसे में दिशा का खास ध्यान रखें। वास्तु शास्त्र में पितरों की तस्वीर लगाने से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि किस दिशा में लगाएं पितरों की तस्वीर।
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है, जिसका समापन अमावस्या तिथि पर होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में पितृ भूलोक पर वास करते हैं। इस दौरान लोग पितरों का तर्पण, श्राद्ध कर्म और पिंडदान करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि इन कामों को करने से व्यक्ति को पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, गलत दिशा में पितरों की तस्वीर लगाने से जीवन में कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है और पितृ नाराज हो सकते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं किस दिशा में लगाएं पितरों की तस्वीर।
इस दिन से शुरू होंगे पितृ पक्ष
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत 08 सितंबर से हो रही है, जिसका समापन 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। इसके अगले दिन यानी 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी।
इन जगहों पर न लगाएं पितरों की तस्वीर
वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेडरूम और किचन में भूलकर भी पितरों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन जगहों पर पितरों की तस्वीर लगाने से पितृ नाराज हो सकते हैं और व्यक्ति के जीवन में कई बाधा आ सकती है। इसलिए इन जगहों पर कभी भी पितरों की तस्वीर न लगाएं।
इस दिशा में लगाएं
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पितृ पक्ष में पितरों की तस्वीर लगाने के लिए दक्षिण दिशा को उत्तम माना जाता है। क्योंकि इस दिशा को पितरों को मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में तस्वीर लगाने से परिवार के सदस्यों पर पितरों की कृपा बनी रहती है और जीवन में आने वाले दुख और संकट दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जीवन में शुभ फल की प्राप्ति होती है।