हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी (Kalashtami 2026) मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने से सभी तरह के भयों से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और बाधाओं का नाश होता है। भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो साधक कालाष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें भैरव बाबा की कृपा मिलती है। आइए इस पर्व से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
कालाष्टमी पूजन सामग्री (Puja Samagri)
भगवान काल भैरव की तस्वीर।
तिल का तेल या सरसों के तेल का दीपक।
लाल चंदन, अक्षत, और लाल फूल।
काले तिल और उड़द की दाल।
धूप, रूई और कपूर।
मौली, गंगाजल और शुद्ध जल।
पूजन विधि (Kalashtami 2026 Puja Vidhi)
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।
व्रत का संकल्प लेते हुए भगवान शिव और काल भैरव का ध्यान करें।
मंदिर में भगवान भैरव के सामने सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
भैरव जी की पूजा रात के समय करना ज्यादा फलदायी माना जाता है।
अगर हो पाए तो भैरव प्रतिमा पर पंचामृत व जल अर्पित करें।
उन्हें लाल चंदन का तिलक लगाएं।
पूजा के दौरान “ॐ कालभैरवाय नमः” या “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” मंत्र का 108 बार जाप करें।
मंत्र जाप के बाद काल भैरव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।
भगवान भैरव के प्रिय भोग (Kalashtami 2026 Bhog List)
बाबा भैरव को मीठी चीजें जैसे इमरती और जलेबी बहुत प्रिय हैं।
इस दिन उड़द की दाल के बड़े या पकोड़े का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
कई स्थानों पर इस मौके पर दूध से बनी मिठाइयों का भी भोग लगाया जाता है।
करें ये काम (Kalashtami 2026 Upay)
काल भैरव का वाहन कुत्ता है। ऐसे में कालाष्टमी के दिन किसी काले कुत्ते को रोटी, दूध या बिस्किट जरूर खिलाएं। ऐसा करने से कुंडली से राहु और केतु जैसे अशुभ ग्रहों का प्रभाव भी कम होता है।


