भारतीय टीम गुरुवार को इंग्लैंड का सामना मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में करेगी। सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में भारत के पास 38 साल पुराना हिसाब बराबर करने का मौका होगा। इंग्लिश टीम ने सुपर-8 में शानदार खेल दिखाया और तीनों मैचों में जीत हासिल कर सेमीफाइनल में जगह बनाई। कप्तान हैरी ब्रूक शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। ऐसे में कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है लेकिन सूर्या एंड कंपनी के पास बड़ा मौका है।
इंग्लैंड और भारत की टीम जब मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक-दूसरे का सामना करेंगी, तो 38 साल पुराना दर्द भारतीय फैंस को याद आएगा। अगर टीम इंडिया मैच में जीत हासिल करती है, तो अंग्रजों से वो हिसाब बराबर हो जाएगा। दरअसल, 38 साल पहले 1987 में इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भारत को हराया था और करोड़ों भारतीय फैंस के सपनों को चकनाचूर कर दिया था।
इंग्लैंड के खिलाफ भारत की सेमीफाइनल में हार
1983 में जब भारत ने वर्ल्ड कप अपने नाम किया, तो टीम इंडिया को अगले विश्व कप यानी 1987 की मेजबानी सौंपी गई। भारत के पास मौका था कि वे अपने घर पर वर्ल्ड कप जीतें और टाइटल भी डिफेंग करें। हालांकि, अंग्रेजों ने इस सपने को तोड़ दिया था। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया मुकाबला इंग्लिश टीम ने 35 रनों से अपने नाम किया था। उस मैच में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए ग्राहम गूच के 115 रनों की पारी के बदौलत 50 ओवरों में 254 रन बनाए थे।
इसके जवाब में टीम इंडिया 45.3 ओवरों में 219 रनों पर सिमट गई। इसी के साथ इंग्लिश टीम ने मुकाबले को 35 रनों से जीत लिया था। भारत के लिए मोहम्मद अजहरूद्दीन ने सबसे अधिक 64 रनों की पारी खेली थी। उनके अलावा कप्तान कपिल देव 30 रन बनाकर दूसरे सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहे थे। बता दें कि ये पहला मौका था, जब किसी वर्ल्ड कप का आयोजन इंग्लैंड के बाहर हो रहा था।
वानखेड़े में हिसाब बराबर करने का मौका
अब 38 सालों बाद भारत और इंग्लैंड की भिड़ंत एक बार फिर वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में हो रही है। वो भी उसी मैदान पर, जहां इंग्लैंड ने भारत को सेमीफाइनल में मात दी थी। अगर सूर्या एंड कंपनी अंग्रेजों को हरा देती है, तो ये न सिर्फ हिसाब बराबर होगा बल्कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में भी जगह मिल जाएगी।



