कर्नाटक के गुंडलुपेट में थोरियम के बड़े भंडार की खोज, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मिल सकती है नई गति

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GSI को कर्नाटक में मिला महत्वपूर्ण थोरियम भंडार

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India – GSI) ने कर्नाटक के चामराजनगर जिले के गुंडलुपेट (Gundlupet) तालुक में थोरियम युक्त खनिज (Thorium-bearing Monazite) के बड़े भंडार की पहचान की है। प्रारंभिक सर्वेक्षण के अनुसार यह भंडार लगभग 700 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जबकि करीब 20 एकड़ क्षेत्र को संभावित खनन (Mining) के लिए कोर ज़ोन के रूप में चिन्हित किया गया है।

क्या है इस खोज का महत्व?

थोरियम एक रेडियोधर्मी धातु है, जिसे भविष्य के स्वच्छ और दीर्घकालिक परमाणु ईंधन के रूप में देखा जाता है। भारत के पास पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े थोरियम संसाधनों में से एक है और यह खोज देश के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को और मजबूती दे सकती है। थोरियम आधारित रिएक्टर भविष्य में यूरेनियम पर निर्भरता कम करने में सहायक माने जाते हैं।

मोनाजाइट खनिज में मिला थोरियम

GSI के अनुसार यह भंडार मुख्य रूप से मोनाजाइट (Monazite) खनिज के रूप में मिला है। मोनाजाइट एक दुर्लभ मृदा (Rare Earth) खनिज है, जिसमें थोरियम के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण रेयर अर्थ तत्व भी पाए जाते हैं। ये खनिज रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, अक्षय ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों में उपयोगी हैं।

आर्थिक और रणनीतिक लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे के विस्तृत सर्वेक्षण और गुणवत्ता परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह खोज भारत के लिए कई क्षेत्रों में लाभदायक साबित हो सकती है—

  • परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
  • रेयर अर्थ खनिजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ेगी।
  • आयात पर निर्भरता कम होगी।
  • खनन और प्रसंस्करण क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर बनेंगे।
  • स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक खनिज सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

आगे की प्रक्रिया

GSI अब इस क्षेत्र में विस्तृत भूवैज्ञानिक अध्ययन, संसाधन मूल्यांकन और पर्यावरणीय परीक्षण करेगा। इसके बाद संबंधित एजेंसियां खनन की व्यवहार्यता का आकलन करेंगी और आवश्यकता पड़ने पर खनन पट्टों की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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