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श्रीलंका: राष्ट्रपति को लगा झटका, रानिल विक्रमसिंघे ने संसद में साबित किया बहुमत

श्रीलंका के अपदस्थ प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने बुधवार को संसद में स्पष्ट बहुमत साबित कर दिया है. उन्हें 26 अक्टूबर को राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था. सिरिसेना के उस विवादित कदम से श्रीलंका में सियासी संकट खड़ा हो गया था. बुधवार को संसद में 225 में से 117 सांसदों ने उनके नेतृत्व को लेकर लाए गए विश्वास प्रस्ताव को पारित करने के पक्ष में मतदान किया. प्रस्ताव का पारित होना राष्ट्रपति सिरिसेना के लिये बड़ा झटका माना जा रहा है, जिन्होंने 69 वर्षीय सिरिसेना को निजी तौर पर नापसंद करते हुए बर्खास्त कर उनकी जगह महिंदा राजपक्षेप को प्रधानमंत्री बना दिया था. 

इससे पहले राजपक्षे संसद में बहुमत साबित नहीं कर पाए थे. मुख्य तमिल माइनॉरिटी पार्टी (टीएनए) ने विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया. राष्ट्रपति सिरिसेना के अतिरिक्त संवैधानिक दखल का विरोध करने वाले वामपंथी दल जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के सांसद अनुपस्थित रहे. अगर जेवीपी के छह सांसदों ने भी विक्रमसिंघे समर्थन में मतदान किया होता तो विक्रमसिंघे राष्ट्रपति द्वारा उन्हें बहाल करने से इनकार के बावजूद विक्रमसिंघे अपराजेय बहुमत हासिल कर लेते.

सिरिसेना के यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम अलायंस ने संसद का बायकॉट जारी रखा. सिरिसेना ने विक्रमसिंघे को बर्खास्त करने के बाद संसद भंग करके पांच जनवरी को चुनाव कराने का एलान किया था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस आदेश पर रोक लगा दी थी. 

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