शुगर, थायराइड से लेकर किडनी की बीमारी में बेहतर लाइफस्टाइल से हो सकता है फायदा

आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह (शुगर), थायरॉयड असंतुलन तथा लिवर, किडनी, हृदय, मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण है- असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता तनाव और अनियमित नींद। जो बीमारियाँ पहले “बुजुर्गों की बीमारी” कही जाती थीं, वे अब युवाओं में भी सामान्य होती जा रही हैं।

हालांकि चिकित्सकीय देखरेख आवश्यक है, लेकिन कई शोध यह दर्शाते हैं कि सुव्यवस्थित जीवनशैली और घरेलू प्राकृतिक उपाय भी संपूर्ण समाधान का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं।

मूल कारणों को समझना
हाल ही में एक फेसबुक लाइव में स्वामी रामदेव ने बताया कि ज़्यादातर पुरानी बीमारियों के पीछे कुछ सामान्य कारण होते हैं जैसे शरीर में सूजन (inflammation), इंसुलिन रेजिस्टेंस(insulin resistance), ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस(oxidative stress)और हार्मोनल असंतुलन।

उदाहरण के लिए, मोटापा टाइप-2 डायबिटीज, हाई बीपी और हृदय रोग का जोखिम बढ़ाता है।

इसी प्रकार लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर किडनी, नसों और मस्तिष्क को नुकसान पहुँचा सकती है।

वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार किया जाए, तो जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है और बीमारी की गति को धीमा किया जा सकता है।

पोषण: स्वस्थ होने की आधारशिला
2025 के एक अध्ययन के अनुसार, खान-पान में सुधार मेटाबॉलिक और अन्य शारीरिक विकारों के प्रबंधन में बेहद ज़रूरी है। सब्जियाँ, साबुत अनाज, दालें, मेवे, बीज और स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित और नियंत्रित मात्रा वाला आहार रक्त शर्करा को संतुलित रखने, बीपी नियंत्रित करने तथा लिवर और किडनी के कार्य को सहारा देने में मदद करता है।

शोध के अनुसार:
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अतिरिक्त चीनी कम करने से इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर होती है।

फाइबर की मात्रा बढ़ाने से कोलेस्ट्रॉल और पाचन स्वास्थ्य सुधरता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड (अलसी, अखरोट या तैलीय मछली से) हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभकारी हैं।

प्रोसेस्ड फूड और अधिक नमक से बचाव हाई बीपी को नियंत्रित करने में सहायक है।

थायरॉयड के लिए प्राकृतिक स्रोतों से पर्याप्त आयोडीन और सेलेनियम लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन किसी भी सप्लीमेंट का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। लिवर या किडनी रोग में व्यक्तिगत डाइट प्लान आवश्यक है।

शारीरिक गतिविधि: प्राकृतिक नियंत्रक
पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक स्वामी रामदेव के अनुसार, “नियमित शारीरिक गतिविधि सबसे प्रभावी और प्रमाणित उपायों में से एक है। मध्यम एरोबिक व्यायाम, शक्ति प्रशिक्षण और लचीलापन बढ़ाने वाले अभ्यास इंसुलिन संवेदनशीलता सुधारते हैं, पेट की चर्बी घटाते हैं और हृदय स्वास्थ्य बेहतर बनाते हैं।”

शोध बताते हैं कि सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का मध्यम व्यायाम:

रक्तचाप कम करता है

शुगर नियंत्रण सुधारता है

लिपिड प्रोफाइल बेहतर बनाता है

मस्तिष्क कार्य को सहारा देता है

योग और प्राणायाम जैसे अभ्यास तनाव से जुड़े हार्मोनल असंतुलन को कम करने में मददगार हो सकते हैं।

तनाव, नींद और नर्वस सिस्टम का संतुलन
लगातार तनाव से cortisol हार्मोन बढ़ता है, जो बीपी, शुगर और वजन पर असर डालता है। लंबे समय का तनाव थायरॉयड और हृदय स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।

अध्ययनों के अनुसार, मैडिटेशन और 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद नर्वस सिस्टम के संतुलन को बहाल करने में सहायक हैं। अच्छी नींद हार्मोन संतुलन, लिवर डिटॉक्स प्रक्रिया और मस्तिष्क की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह
घरेलू उपाय और बेहतर लाइफस्टाइल सहायक हैं, लेकिन वे चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं हैं। ब्लड प्रेशर, HbA1c, थायरॉयड, लिवर एंजाइम और किडनी फंक्शन की नियमित जांच आवश्यक है। समय पर पहचान से जटिलताओं से बचा जा सकता है।

मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग को अलग-अलग समस्या मानने के बजाय उन्हें आपस में जुड़ी स्थितियों के रूप में समझना चाहिए। शोध-आधारित और समग्र जीवनशैली अपनाकर जीवन की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार संभव है।

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