आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का शेयर सोमवार को 18.39% गिर गया। बैंक ने अपनी चंडीगढ़ ब्रांच में 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड का खुलासा किया। हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में हुई इस धोखाधड़ी के बाद, राज्य सरकार ने बैंक को डी-एम्पेनल कर दिया है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का शेयर सोमवार को धड़ाम हो गया है। करीब 10 बजे BSE पर बैंक का शेयर (IDFC First Bank Share Price) 18.39% फिसलकर 68.19 रुपये के भाव पर पहुंच गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बैंक ने अपनी चंडीगढ़ ब्रांच में 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड का खुलासा किया। एक रेगुलेटरी फाइलिंग में जानकारी देते हुए, IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा कि उसकी चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ कर्मचारी हरियाणा सरकार से जुड़े अकाउंट से 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड ट्रांजैक्शन में शामिल रहे। बैंक ने इंटरनल जांच के नतीजे आने तक, इसमें शामिल होने के शक में चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।
राज्य सरकार ने तोड़ा नाता
हरियाणा सरकार के फाइनेंस डिपार्टमेंट ने रविवार, 22 फरवरी को एक ऑफिशियल सर्कुलर में कहा कि पूरे राज्य में IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में रखे सभी सरकारी बैंक अकाउंट तुरंत डी-एम्पेनल कर दिए जाएंगे। यह कदम फ्रॉड का खुलासा होने के बाद उठाया गया है।
राज्य सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार, इन दो प्राइवेट बैंकों के जरिए किसी भी सरकारी फंड को जमा करने, इन्वेस्ट करने या ट्रांजैक्शन करने की इजाजत नहीं है। सर्कुलर के अनुसार, सभी डिपार्टमेंट दोनों बैंकों से बैलेंस ट्रांसफर करेंगे और अकाउंट बंद करेंगे। राज्य सरकार ने यह सर्कुलर हरियाणा में चल रहे सभी सरकारी डिपार्टमेंट्स के साथ-साथ पब्लिक, प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंकों को भेजा है।
पुलिस के पास शिकायत दर्ज
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अनुसार, “बैंक लागू कानून के मुताबिक, दोषी कर्मचारियों और दूसरे बाहरी लोगों के खिलाफ सख्त डिसिप्लिनरी, सिविल और क्रिमिनल एक्शन लेगा।” इसने पुलिस अधिकारियों के पास शिकायत भी दर्ज कराई है।
बैंक ने कुछ बेनिफिशियरी बैंकों को रिकॉल रिक्वेस्ट भेजी हैं, जिसमें संदिग्ध माने गए अकाउंट्स में बैलेंस को लियन-मार्क करने की मांग की गई है। इसके अलावा, IDFC फर्स्ट बैंक मामले की पूरी तरह से जांच करने के लिए फोरेंसिक ऑडिट करने के लिए एक इंडिपेंडेंट बाहरी एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया में है।
कैसे हुआ फ्रॉड का पर्दाफाश?
इस फ्रॉड का खुलासा तब हुआ, जब हरियाणा सरकार ने अपना अकाउंट बंद करने और फंड दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट की। इस प्रोसेस के दौरान, बैंक के रिकॉर्ड में दिखाए गए बैलेंस और सरकारी संस्थाओं द्वारा बताई गई रकम में अंतर दिखा।
हालांकि बैंक ने साफ किया है कि यह फ्रॉड चंडीगढ़ ब्रांच के जरिए चलाए जा रहे कुछ खास सरकारी-लिंक्ड अकाउंट तक ही सीमित रहा और इसका ब्रांच के दूसरे कस्टमर्स पर कोई असर नहीं पड़ा।



