Rahul Gandhi Supreme Court Petition: SIR पर रोक की मांग, विपक्ष की याचिका में मिलीं 14 खामियां

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सोमवार, 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में मार्च निकालने के बाद अदालत में याचिका दाखिल की। इसमें मतदाता सूची से कथित तौर पर मनमाने तरीके से नाम हटाए जाने की जांच, SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक और चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। हालांकि, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 प्रक्रियागत खामियां बताईं, जिसके कारण अभी सुनवाई के लिए इसे सूचीबद्ध नहीं किया गया है।

राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं ने दाखिल की याचिका

INDIA गठबंधन की ओर से दाखिल याचिका में राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, आरजेडी के तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, डी राजा, सुप्रिया सुले समेत अन्य विपक्षी नेता शामिल हैं। नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी भी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो।

याचिका में क्या-क्या मांगें रखी गईं?

विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मतदाता सूची में हुए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट कराने और SIR से जुड़ी प्रक्रिया की जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। प्रस्तावित समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित लोगों को शामिल करने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में चुनाव आयोग से मतदाता सूची में हटाए गए नामों की बूथवार जानकारी, नाम हटाने के कारण और संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग भी शामिल है। विपक्ष चाहता है कि किसी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित नोटिस और सुनवाई के न हटाया जाए। इसके अलावा, SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा करने का भी अनुरोध किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने क्यों बताईं खामियां?

13 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, अदालत की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 कमियां दर्ज कीं। इनमें नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे या वकील को अधिकृत करने वाले दस्तावेजों की कमी, मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट प्रति और कुछ जरूरी दस्तावेजों का अधूरा होना शामिल है।

इसके अलावा, कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी भी बताई गई। रजिस्ट्री ने कुछ अन्य दस्तावेजों और चुनाव आयुक्तों को पक्षकार बनाने से जुड़े प्रक्रियागत सवाल भी उठाए हैं। याचिका दाखिल करने वाले वकील ने कहा है कि इन कमियों को दूर किया जाएगा।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रजिस्ट्री की आपत्तियां याचिका की तकनीकी प्रक्रिया से जुड़ी हैं। इन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा विपक्ष के आरोपों को खारिज किए जाने या मामले के गुण-दोष पर फैसला सुनाए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात नहीं हो पाई

याचिका दाखिल करने से पहले विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने लंबित न्यायिक मामले पर चर्चा के लिए मुलाकात करने से इनकार करते हुए नेताओं को उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने का रास्ता बताया। इसके बाद विपक्ष ने अदालत में याचिका दाखिल की।

चुनाव आयोग और भाजपा का क्या कहना है?

विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और इससे पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाता दोबारा नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अपना सकते हैं। भाजपा ने भी विपक्ष के आंदोलन की आलोचना की है।

फिलहाल, याचिका में बताई गई खामियों को दूर किए जाने के बाद ही सुनवाई की अगली स्थिति स्पष्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोप राजनीतिक दावे हैं, न्यायिक रूप से सिद्ध निष्कर्ष नहीं।

Related Articles

Back to top button