Ahoi Ashtami 2026 Puja Vidhi: हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन माताएं पूरे श्रद्धाभाव से अहोई माता की पूजा करती हैं और अपनी संतान की तरक्की, अच्छे स्वास्थ्य तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं। करवा चौथ के कुछ दिनों बाद आने वाला यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस व्रत में पूजा-पाठ के साथ तारों को अर्घ्य देने की परंपरा भी निभाई जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत रखने और विधि-विधान से माता की पूजा करने से संतान पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। यही वजह है कि महिलाएं इस दिन सुबह से ही व्रत की तैयारियां शुरू कर देती हैं। अगर आप भी इस साल अहोई अष्टमी का व्रत रखने जा रही हैं, तो पूजा की सही विधि और जरूरी नियमों के बारे में जानना आपके लिए महत्वपूर्ण है।
अहोई अष्टमी पर कैसे करें व्रत की शुरुआत?
अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर अहोई माता का ध्यान करें। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए व्रत रखने का संकल्प लें। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुछ परिवारों में फलाहार करने की परंपरा भी प्रचलित है।
व्रत के दौरान मन में अच्छे विचार रखें और माता का स्मरण करते रहें। पूजा के लिए घर के पूजा स्थल या दीवार को अच्छी तरह साफ कर लें।
अहोई माता की पूजा के लिए तैयार रखें ये सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक चीजें एकत्रित कर लें। इसके लिए अहोई माता का चित्र, रोली, अक्षत, फूल, धूप, अगरबत्ती, घी का दीपक, जल से भरा कलश, फल और मिठाई की आवश्यकता होती है। इसके अलावा पूजा के प्रसाद के लिए हलवा और पूरी भी तैयार की जा सकती है।
कुछ परिवारों में चांदी की अहोई या स्याहू और उसके बच्चों की आकृति रखने की परंपरा होती है। पूजा सामग्री में स्थानीय और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार बदलाव हो सकता है।
जानिए अहोई माता की पूजा करने का पूरा तरीका
सबसे पहले दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाएं या उनकी तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद माता के सामने चौकी लगाकर पूजा की थाली सजाएं। दीपक जलाएं और माता को रोली, अक्षत तथा फूल अर्पित करें।
इसके बाद फल और मिठाई का भोग लगाकर अहोई माता का ध्यान करें। पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ना या सुनना शुभ माना जाता है। कथा पूरी होने के बाद माता की आरती करें और संतान की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने का क्या है सही तरीका?
इस व्रत में तारों को अर्घ्य देने की परंपरा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। शाम को पूजा पूरी करने के बाद आसमान में तारे दिखाई देने का इंतजार किया जाता है। जैसे ही तारे स्पष्ट नजर आने लगें, एक लोटे में साफ जल भरकर छत या खुले स्थान पर जाएं।
इसके बाद तारों के दर्शन करते हुए श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। हाथ जोड़कर अहोई माता से अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सफलता की कामना करें। इसके बाद माता को प्रणाम करें और परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।
अहोई अष्टमी पर तारों को ही क्यों दिया जाता है अर्घ्य?
करवा चौथ और अहोई अष्टमी के व्रत में एक बड़ा अंतर इनके पारण की परंपरा में देखने को मिलता है। करवा चौथ पर महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं, जबकि अहोई अष्टमी पर अधिकतर स्थानों में तारों को देखकर जल चढ़ाने की परंपरा है।

हालांकि, कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देने की रीति भी प्रचलित है। इसलिए पूजा और व्रत का समापन अपने परिवार की मान्यताओं तथा स्थानीय परंपरा के अनुसार करना चाहिए।
ध्यान रखने वाली बात: अहोई अष्टमी पर पूजा और तारों के दर्शन का समय अलग-अलग शहरों में बदल सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय जरूर जांच लें। व्रत के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।


