अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए दान की रकम में कथित हेराफेरी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। 2 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि मंदिर में दान की नकदी की गिनती के दौरान ही कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने पैसे निकालकर गड़बड़ी की थी। जांच में सीसीटीवी फुटेज और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कई घटनाओं का पता चलने की बात सामने आई है। मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
गिनती के दौरान कैसे होती थी कथित चोरी?
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जिन लोगों को दानपात्रों से नकदी निकालने और उसकी गिनती करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनमें से कुछ लोग इसी प्रक्रिया के दौरान पैसे निकाल लेते थे। आरोप है कि इस रकम को निजी बैंक खातों में जमा किया जाता था या दूसरी जगह निवेश किया जाता था।
एसआईटी की जांच में सीसीटीवी फुटेज से नकदी को कथित तौर पर हटाने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आने की जानकारी पहले सुप्रीम कोर्ट को दी गई थी। जांच टीम ने फुटेज के साथ डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयान और बैंक खातों के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की।
आठ आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
इस मामले में 25 जून 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान दान की गिनती और उससे जुड़े कामों में शामिल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।
एसआईटी ने जांच के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया है। जांच में कथित रूप से गबन की गई रकम से जुड़े बैंक लेनदेन और संपत्तियों की भी पड़ताल की गई। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
2 नवंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि मामले की जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने संबंधित ट्रायल कोर्ट को कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इसका मतलब है कि अदालत ने अभी आरोपियों को दोषी या निर्दोष घोषित नहीं किया है। अब ट्रायल कोर्ट में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

दान की पारदर्शिता पर उठे सवाल
राम मंदिर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दान करते हैं। ऐसे में दान की गिनती, सुरक्षा और बैंक खातों में रकम जमा करने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। इस मामले ने मंदिरों में मिलने वाले चढ़ावे के प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अब इस मामले में आगे की सुनवाई और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों पर सबकी नजर रहेगी।
