भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में मैदान पर उतरते ही स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने इतिहास रच दिया। यह उनका वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में 50वां मुकाबला है। इसके साथ ही जडेजा WTC इतिहास में 50 मैच खेलने वाले पहले भारतीय और पहले एशियाई क्रिकेटर बन गए हैं।

जडेजा के नाम बड़ी उपलब्धि
रवींद्र जडेजा WTC की शुरुआत से ही भारतीय टेस्ट टीम का अहम हिस्सा रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग WTC साइकल में लगातार भारत का प्रतिनिधित्व किया है। 2019-21 साइकल में उन्होंने 11, 2021-23 में 13 और 2023-25 में 15 मैच खेले। मौजूदा 2025-27 WTC साइकल में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट उनका 11वां मुकाबला है।
50 WTC मैचों में जडेजा के नाम 2,600 से ज्यादा रन और 160 विकेट दर्ज हैं। यही आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि बल्ले से भी टीम इंडिया को लगातार योगदान दिया है।
ऑलराउंड प्रदर्शन से बनाई अलग पहचान
जडेजा की सबसे बड़ी ताकत उनका ऑलराउंड प्रदर्शन रहा है। टेस्ट क्रिकेट में वह निचले क्रम में तेजी से रन बनाने के साथ-साथ बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी से महत्वपूर्ण विकेट लेने की क्षमता रखते हैं।
कोलंबो टेस्ट में भी उन्होंने बल्ले से उपयोगी योगदान दिया। पहली पारी में जडेजा ने 43 रन बनाए और देवदत्त पडिक्कल के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी की।
भारतीय क्रिकेट में भी सबसे आगे
जडेजा के 50वें WTC मैच के साथ वह भारत की ओर से इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उनके बाद मोहम्मद सिराज 47 मैचों के साथ भारतीय खिलाड़ियों में आगे हैं, जबकि विराट कोहली ने अपने WTC करियर में 46 मुकाबले खेले।
निष्कर्ष
रवींद्र जडेजा का 50वां WTC मैच भारतीय क्रिकेट के लिए एक खास उपलब्धि है। वह न केवल इस आंकड़े तक पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं, बल्कि पहले एशियाई क्रिकेटर भी हैं। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में योगदान देने वाले जडेजा ने WTC में अपनी निरंतरता और उपयोगिता का एक और बड़ा उदाहरण पेश किया है।
