अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के सख्त पालन के बीच 86 कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 2 सितंबर तक अमेरिकी बलों ने 86 वाणिज्यिक जहाजों को डायवर्ट किया, जबकि तीन जहाजों को निष्क्रिय किया गया और दो जहाजों पर सवार होकर जांच की गई।

जहाजों की आवाजाही पर बढ़ा दबाव
अमेरिकी नौसेना ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार पर अपनी नाकेबंदी को सख्ती से लागू कर रही है। इस कार्रवाई का सीधा असर उन वाणिज्यिक जहाजों पर पड़ रहा है, जो ईरानी बंदरगाहों से जुड़ी आवाजाही कर रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि नाकेबंदी का उद्देश्य ईरान से जुड़े समुद्री परिवहन और तेल निर्यात पर दबाव बनाना है।
86 जहाजों का रास्ता बदले जाने की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और वैश्विक शिपिंग को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान के आसपास के समुद्री मार्गों में पहले ही जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे चल रही है।
3 जहाज निष्क्रिय, 2 पर की गई बोर्डिंग
CENTCOM के ताजा अपडेट के अनुसार, अमेरिकी बलों ने नाकेबंदी लागू करने के दौरान तीन वाणिज्यिक जहाजों को निष्क्रिय किया और दो जहाजों पर बोर्डिंग की। अमेरिकी पक्ष इसे नाकेबंदी के नियमों का पालन सुनिश्चित करने की कार्रवाई बता रहा है।
इस घटनाक्रम से समुद्री कारोबारियों के बीच भी चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि ईरान से जुड़े समुद्री रास्तों पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से माल ढुलाई, बीमा और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहती है।
दुनिया के लिए क्यों अहम है यह संकट?
ईरान से जुड़ा यह समुद्री संकट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और LNG का वैश्विक व्यापार होता है। हाल के दिनों में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में तेज गिरावट देखी गई है। Reuters के मुताबिक, 3 सितंबर को सिर्फ चार कमोडिटी जहाजों ने होर्मुज से गुजरने की जानकारी दी, जबकि 10 दिनों का औसत करीब 15 जहाज प्रतिदिन था।
अगर समुद्री आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो इसका असर तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। हालिया बाजार संकेतों में भी ईरान-अमेरिका तनाव के कारण तेल की कीमतों पर दबाव देखा गया है।
ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा
अमेरिकी नाकेबंदी और प्रतिबंधों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी दबाव के बीच ईरान के तेल निर्यात में भारी गिरावट आई है और उसकी विदेशी मुद्रा तक पहुंच भी प्रभावित हुई है।
ऐसे में 86 जहाजों का रास्ता बदले जाने की घटना को सिर्फ समुद्री सुरक्षा का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि यह ईरान पर बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक दबाव का हिस्सा भी है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है। समुद्री रास्तों पर आगे अमेरिकी कार्रवाई और ईरान की प्रतिक्रिया से स्थिति और गंभीर हो सकती है। वहीं, वैश्विक बाजारों की नजर इस बात पर बनी हुई है कि होर्मुज और आसपास के समुद्री मार्गों में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही कब तक सामान्य हो पाती है।



