उत्तर प्रदेशराज्य

विवेक तिवारी हत्‍याकांड के दोनों आरोपी पुलिसवालों की कोर्ट में पेशी आज

लखनऊ के विवेक तिवारी हत्‍याकांड मामले की सुनवाई आज (21 दिसंबर) कोर्ट में होगी. इस दौरान हत्‍याकांड के दोनों आरोपी पुलिसवालों प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार की भी पेशी होगी. इनकी पेशी विवेचक की अर्जी पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद प्रकाश सिंह के सामने होगी. विवेचक ने अर्जी लगाकर मांग की थी कि दोनों आरोपियों को जेल से तलब करके उनके अभिरक्षा वारंट सही करके आरोप पत्र पर संज्ञान ले लिया जाए.

बता दें कि लखनऊ के विवेक तिवारी हत्याकांड में स्पेशल इन्वेटिगेशन टीम (एसआईटी) ने सीजेएम कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है. यह चार्जशीट आरोपी प्रशांत चौधरी और संदीप के खिलाफ दाखिल की गई है. विवेक तिवारी हत्याकांड में मामले के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर महानगर विकास पाण्डेय ने एडीजी लखनऊ को एसआईटी रिपोर्ट भी सौंप दी है. एसआईटी ने सिपाही संदीप के खिलाफ मारपीट की धारा में चार्जशीट दाखिल की है.

एसआईटी जांच के मुताबिक वारदात के समय विवेक तिवारी की गाड़ी चल रही थी और विवेक की गाड़ी से सिपाही प्रशांत और संदीप की जान खतरे में नहीं थी. इन हालातों में सीधे निशाना लेकर विवेक पर गोली चलाना फायरिंग की ट्रेनिंग के खिलाफ है. आरोप पत्र में कहा गया है कि एयर बैग खुले होने से साबित हुआ गाड़ी चल रही थी और सीट बेल्ट पर खून के निशान भी मिले हैं.

चार्जशीट रिपोर्ट के मुताबिक, जिस पिस्टल से गोली मारी गई वह सिपाही प्रशांत कुमार के नाम पर अलॉट थी. प्रशांत को मालूम था कि गोली चलाने का अंजाम क्या हो सकता है. फॉरेंसिक सबूतों से यह बात साबित हुई है. चार्जशीट में सिपाही प्रशांत चौधरी के खिलाफ हत्या की धारा लगाते हुए पूरी वारदात का मुख्य आरोपी बताया गया है.

चार्जशीट में प्रशांत चौधरी के खिलाफ 302 की धारा लगाई गई है और वारदात के वक्त मौजूद एक अन्य सिपाही संदीप पर मारपीट की धारा लगाई गई है. कई साक्ष्यों का हवाला देते हुए प्रशांत को दोषी माना है. तत्कालीन सीओ गोमती नगर चक्रेश मिश्रा, इंस्पेक्टर डीपी तिवारी पर भी कार्रवाई की संस्तुति हुई है. अब डीजीपी ओपी सिंह ये तय करेंगें कि आईपीएस चक्रेश मिश्रा और डीपी तिवारी पर क्या कार्रवाई होने चाहिए.

आपको बता दें कि 28 सितंबर में विवेक तिवारी हत्याकांड के बाद यूपी ही नहीं पूरे देश में सियासी घमसान मच गया था. इस हत्याकांड से यूपी पुलिस की छवि भी धूमिल हुई थी

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