भरतपुर गांव में बृहस्पतिवार को एक तेंदुआ वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। 36 घंटे पहले इसी गांव में तेंदुए ने एक महिला पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। वन विभाग का कहना है कि तेंदुओं की पहचान करना मुश्किल कार्य है। ऐसे में पुख्ता ताैर पर नहीं कहा जा सकता कि यह वही तेंदुआ है जिसने एक दिन पहले महिला को घायल किया था।
15 सितंबर की शाम निर्वेश देवी (39) घास काट रही थीं। तभी अमर सिंह के गन्ने के खेत से निकले तेंदुए ने उन पर हमला कर घायल कर दिया था। उनका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है और हालत में सुधार है। इसके बाद वन विभाग ने आसपास सघन सर्च अभियान चलाया, जिसमें ड्रोन से भी तेंदुए की लोकेशन ट्रेस की गई।
कांठ, मुरादाबाद और ठाकुरद्वारा से टीमें भरतपुर में कैंप कर रहीं थीं। तेंदुए को पकड़ने के लिए दो पिंजरे लगाए गए थे। रेंजर राजेश कुमार शर्मा और डिप्टी रेंजर पुष्पेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम निगरानी कर रही थी। इस दाैरान 17 सितंबर की सुबह तेंदुआ उसी स्थान पर पिंजरे में कैद हुआ, जहां उसने महिला पर हमला किया था।
पकड़े गए तेंदुए की आयु करीब पांच वर्ष है और वह मादा है। डियर पार्क में चिकित्सकों ने उसका मेडिकल परीक्षण किया, जिसमें वह पूरी तरह स्वास्थ्य पाया गया। डीएफओ डॉ. विनय कुमार सिंह का कहना है कि अब तक 16 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं।
क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा तेंदुओं का आतंक
कांठ क्षेत्र में लगातार तेंदुए दिखाई देने से लोगों में दहशत है। 16 सितंबर को कांठ के गांव रामसराय भंकरी में भी एक तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ था। इससे पहले 24 अगस्त को भी वन विभाग ने रामसराय से तेंदुए को पकड़ा था। पकड़े गए दोनों तेंदुए फिलहाल डियर पार्क में हैं और उन्हें कहां छोड़ा जाएगा, इस पर विचार चल रहा है।
भरतपुर में तेंदुआ पकड़े जाने के बाद भी एहतियात के तौर पर वन विभाग का कैंप जारी है। वन दरोगा राजेंद्र सिंह ने बताया कि अभी एक पिंजरा भरतपुर में लगा है। इसके अलावा कांठ तहसील के सलेमपुर, पाइंदापुर, समंदपुर बुनियादपुर, शाहपुर अब्दुलबारी, दयानाथपुर और कासमपुर जैसे अन्य गांवों में भी पिंजरे लगाए गए हैं। 16 सितंबर की शाम छात्र रविकांत रॉय और विशेष रॉय ने भी सदरपुर से लौटते समय रास्ते में तेंदुआ देखा था।

