राहुल गांधी का बीजेपी पर तीखा हमला, बोले- किसान भूलता नहीं; महाराष्ट्र की गोकुल डेयरी चुनाव को लेकर बढ़ा सियासी विवाद

महाराष्ट्र की राजनीति में गोकुल डेयरी के चुनाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि गोकुल डेयरी के चुनाव में हार मिलने के बाद भाजपा अब नियमों में बदलाव करके चुनावी जनादेश को पलटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “दूध उत्पादकों का वोट चुराने वाले याद रखें, किसान भूलता नहीं है।” इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है।

गोकुल डेयरी चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल की जीत

दरअसल, महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को गोकुल डेयरी के नाम से जाना जाता है। यह राज्य की प्रमुख सहकारी डेयरी संस्थाओं में शामिल है। इसके निदेशक मंडल की 25 सीटों के लिए 19 अक्टूबर 2026 को चुनाव हुए थे।

इस चुनाव में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा समर्थित महायुति गठबंधन को 12 सीटें मिलीं। इस तरह कांग्रेस समर्थित पैनल ने एक सीट के अंतर से बहुमत हासिल कर लिया। चुनाव परिणाम को महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर देखा गया।

राहुल गांधी ने एक्स पर क्या कहा?

चुनाव परिणाम के बाद महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित फैसले पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि दूध उत्पादकों ने चुनाव में भाजपा को हराया तो अब सरकार चार निदेशकों को शामिल करके बहुमत का गणित बदलना चाहती है।

राहुल गांधी ने इसे दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी और जनादेश में मिलावट करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उनके मुताबिक, किसानों के मताधिकार और लोकतांत्रिक फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।

महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर क्यों उठ रहे सवाल?

विवाद की मुख्य वजह महाराष्ट्र कैबिनेट का वह प्रस्ताव है, जिसके तहत सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन मंडल में सरकार की ओर से नामित सदस्यों को शामिल करने की मंजूरी दी गई है। कांग्रेस का आरोप है कि इस फैसले के जरिए गोकुल डेयरी के निर्वाचित निदेशक मंडल का समीकरण बदला जा सकता है।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, सरकार चार ऐसे निदेशकों को मतदान का अधिकार देने की तैयारी कर रही है, जिससे 25 सदस्यीय बोर्ड में बहुमत का गणित प्रभावित हो सकता है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव में जिस पैनल को दूध उत्पादकों ने समर्थन दिया, उसे ही संस्था चलाने का अधिकार मिलना चाहिए।

पवन खेड़ा ने भी सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी महाराष्ट्र सरकार के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विधायी बदलावों के जरिए दूध उत्पादकों के लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

खेड़ा के अनुसार, महायुति समर्थित निदेशकों की गैरमौजूदगी के कारण अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका था। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को नए सिरे से अध्यक्ष पद का चुनाव कराने का निर्देश दिया। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार का नया प्रस्ताव निर्वाचित बोर्ड की स्थिति बदल सकता है।

खेड़ा ने यह भी कहा कि कांग्रेस इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कह रही है, ताकि सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनावी जनादेश की रक्षा की जा सके।

क्या है गोकुल डेयरी का राजनीतिक महत्व?

गोकुल डेयरी केवल दूध उत्पादन और कारोबार तक सीमित संस्था नहीं है, बल्कि पश्चिमी महाराष्ट्र की ग्रामीण राजनीति में भी इसका काफी प्रभाव है। इससे हजारों गांवों की दुग्ध उत्पादक समितियां और लाखों किसान जुड़े हुए हैं।

गोकुल डेयरी की स्थापना 1963 में हुई थी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इससे करीब 4.41 लाख दूध उत्पादक, 8,009 प्राथमिक समितियां और लगभग 1,810 गांव जुड़े हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में संस्था का सालाना कारोबार करीब 3,966 करोड़ रुपये रहा। यही वजह है कि इसके निदेशक मंडल पर नियंत्रण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला इतना अहम माना जा रहा है।

महाराष्ट्र की राजनीति में आगे क्या होगा?

गोकुल डेयरी विवाद अब चुनावी नतीजों से आगे बढ़कर सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता और सरकारी हस्तक्षेप की बहस बन गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे किसानों के जनादेश का अपमान बता रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के प्रस्तावित बदलावों को लेकर कानूनी और राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं।

अब सभी की नजर 10 नवंबर को होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव और प्रस्तावित कानूनी बदलावों पर रहेगी। यह देखना अहम होगा कि इस विवाद में अदालत का रुख क्या रहता है और गोकुल डेयरी के प्रबंधन की कमान किसके हाथ में जाती है। फिलहाल राहुल गांधी के बयान ने महाराष्ट्र में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

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