टोक्यो। दुनिया के सबसे विकसित देशों में शामिल जापान इन दिनों एक अलग तरह के संकट का सामना कर रहा है। यहां समस्या बेरोजगारी या महंगाई नहीं, बल्कि तेजी से घटती जनसंख्या (Population Decline) है। लगातार कम होती जन्मदर और बढ़ती बुजुर्ग आबादी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इस चुनौती से निपटने के लिए जापान सरकार कई नई योजनाएं चला रही है। इन्हीं प्रयासों के तहत टोक्यो प्रशासन ने AI आधारित डेटिंग ऐप ‘Tokyo Enmusubi’ लॉन्च किया है, जिसकी मदद से सैकड़ों लोगों की शादियां हो चुकी हैं।

आखिर क्यों घट रही है जापान की आबादी?
जापान में पिछले कई वर्षों से जन्मदर लगातार गिर रही है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण बताए जाते हैं—
- युवा पीढ़ी का देर से शादी करना।
- करियर को परिवार से ज्यादा प्राथमिकता देना।
- बच्चों की परवरिश का बढ़ता खर्च।
- महंगी जीवनशैली और छोटे घर।
- कम होती विवाह दर।
इन कारणों से हर साल जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या घटती जा रही है, जबकि बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है।
घटती जनसंख्या से क्या खतरे हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी देश की आबादी लगातार घटती रहे तो उसके कई गंभीर आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़ सकते हैं।
1. श्रमिकों की कमी
काम करने वाली युवा आबादी घटने से उद्योगों, फैक्ट्रियों और सेवा क्षेत्र में कर्मचारियों की कमी होने लगती है।
2. आर्थिक विकास पर असर
कम आबादी का मतलब कम उत्पादन, कम उपभोग और धीमी आर्थिक वृद्धि भी हो सकता है।
3. बुजुर्गों का बढ़ता बोझ
जब बुजुर्गों की संख्या युवाओं से ज्यादा हो जाती है तो सरकार पर पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा का खर्च तेजी से बढ़ जाता है।
4. गांव और छोटे शहर खाली होना
जापान के कई ग्रामीण इलाकों में आबादी इतनी कम हो गई है कि वहां स्कूल, दुकानें और कई सरकारी सेवाएं बंद होने लगी हैं।
AI डेटिंग ऐप से बढ़ावा दे रही है सरकार
जनसंख्या संकट से निपटने के लिए टोक्यो महानगर प्रशासन ने AI आधारित डेटिंग प्लेटफॉर्म “Tokyo Enmusubi” शुरू किया है।
इस ऐप की खासियतें—
- AI के जरिए उपयुक्त जीवनसाथी का सुझाव।
- सरकारी सत्यापन प्रक्रिया।
- गंभीर रिश्तों पर फोकस।
- विवाह को बढ़ावा देने की पहल।
सरकार का मानना है कि यदि अधिक युवा विवाह करेंगे तो जन्मदर बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
सिर्फ ऐप ही नहीं, कई और योजनाएं
जापान सरकार पहले से ही कई कदम उठा रही है—
- बच्चों के लिए आर्थिक सहायता।
- मातृत्व और पितृत्व अवकाश में बढ़ोतरी।
- डे-केयर सुविधाओं का विस्तार।
- परिवारों के लिए टैक्स में राहत।
- युवाओं को विवाह के लिए प्रोत्साहन।
फिर भी अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है।
क्या अन्य देशों के लिए भी खतरे की घंटी?
केवल जापान ही नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया, इटली, स्पेन और कई यूरोपीय देशों में भी जन्मदर लगातार घट रही है। संयुक्त राष्ट्र की कई रिपोर्टों में भविष्य में कई विकसित देशों के सामने श्रमिकों की कमी और वृद्ध आबादी का संकट बढ़ने की आशंका जताई गई है।
भारत की स्थिति अलग
भारत फिलहाल दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों में शामिल है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दशकों में भारत की जन्मदर में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। इसलिए दीर्घकालिक जनसंख्या संतुलन बनाए रखना हर देश के लिए महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
जापान का जनसंख्या संकट केवल एक देश की समस्या नहीं, बल्कि भविष्य में कई विकसित देशों के सामने आने वाली बड़ी चुनौती का संकेत है। AI आधारित डेटिंग ऐप से लेकर आर्थिक प्रोत्साहन तक, जापान सरकार जन्मदर बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये योजनाएं देश की घटती आबादी को रोकने में कितनी सफल होती हैं।


