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हाफिज के जुम्मे के संबोधन पर रोक, 10 धार्मिक स्कूलों पर भी PAK सरकार का कब्जा

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत की कूटनीति के कारण पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बन रहा है. पाकिस्तान पर इस दबाव का असर होना शुरू हो गया है, बीते एक हफ्ते में पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई शुरू की है. इसके अलावा इन संगठनों द्वारा संचालित मदरसों और स्कूलों पर भी सरकारी कब्जा हो गया है. शुक्रवार को पाकिस्तानी सरकार ने 10 धार्मिक स्कूलों पर कब्जा किया है.

पाकिस्तान ने मुम्बई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर में जमात-उद-दवा (JuD) के मुख्यालयों में जुम्मे की नमाज के बाद संबोधन करने पर रोक लगा दी गई है. हाल के वर्षों में शायद ऐसा पहली बार है कि हाफिज सईद लाहौर में होने के बावजूद भी जेयूडी मुख्यालय जामिया मस्जिद कदसिया में जुम्मे का संबोधन नहीं दे पाएगा. आपको बता दें कि हाफिज सईद कई बार जुम्मे की नमाज के बाद भाषणों में भारत के खिलाफ ज़हर उगलता रहा है.

गौरतलब है कि इससे पहले कभी भी हाफिज सईद को कभी भी जुम्मे का संबोधन देने से नहीं रोका गया, उस दौर में भी नहीं, जब मस्जिद कदसिया का नियंत्रण पंजाब सरकार के हाथों में था.

पाकिस्तान की पंजाब सरकार के मुताबिक, ‘‘पंजाब पुलिस ने जामिया मस्जिद कदसिया को सील कर दिया है. सईद को शुक्रवार को अपना साप्ताहिक संबोधन देने के लिए परिसर में घुसने नहीं दिया जाएगा.’’

उन्होंने कहा, ‘‘सईद ने पंजाब सरकार से उसे कदसिया मस्जिद में शुक्रवार को संबोधन देने की इजाजत देने का अनुरोध किया लेकिन अनुरोध ठुकरा दिया गया. यह सईद के प्रभाव को देखते हुए बड़ा अहम माना जा रहा है क्योंकि पहली बार सरकार ने उसे संबोधित करने से मना किया है.’’

 गौरतलब है कि पाकिस्तान प्रशासन ने प्रतिबंधित संगठनों पर वर्तमान कार्रवाई के तहत गुरुवार को JuD और FiF के मुख्यालयों को सील कर दिया और 120 से अधिक आतंकवादियों को हिरासत में ले लिया. इससे पहले भी पाकिस्तान की ओर से जैश-ए-मोहम्मद के कुछ ठिकानों को सरकारी कब्जे में लिया गया था.

JuD को लश्कर-ए-तैयबा का अग्रिम संगठन माना जाता है. लश्कर ए तैयबा ही मुम्बई हमले के जिम्मेदार है जिसमें 166 लोगों की जान चली गई थी. अमेरिका ने जून, 2014 में लश्कर ए तैयबा को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था.

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