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जीएसटी का लाभ नहीं देने वालों की होगी जांच

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की घटी दर का फायदा बिना ब्रांड वाले उत्पादों पर नहीं देने वालों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्यवाही की तैयारी कर रही है।

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय ने ऐसे उत्पाद बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इनमें आटा, दाल बेसन और सूजी जैसे उत्पाद प्रमुखता से शामिल हैं, जो जिंस की श्रेणी में आते हैं। सरकार को शिकायतें मिल रही हैं कि बिना पंजीकृत ब्रांड के ऐसे उत्पाद बेचने वाली कंपनियां और मिलें जीएसटी की दर में कमी का लाभ ग्राहकों को नहीं पहुंचा रही हैं।

इन शिकायतों पर कार्यवाही करते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नेशनल एंटी प्रॉफिटियरिंग एजेंसी से ऐसी कंपनियों की जांच करने को कहा है। पिछले दिनों ही सरकार ने ऐसे नॉन-ब्रांडेड उत्पादों पर जीएसटी की दर को शून्य फीसद कर दिया था। हालांकि ब्रांडेड अनाज पर पांच फीसद जीएसटी लगता है। ऐसे उत्पादों के शून्य फीसद की श्रेणी में आने के बाद कई कंपनियों और मिलों ने जीएसटी से बचने के लिए इन उत्पादों के अपने ब्रांड सरेंडर कर दिए थे। लेकिन कंपनियों ने उत्पाद की कीमतें कम नहीं कीं, जिसकी लगातार शिकायतें मिल रही थीं। 

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