विदेश

लंदन में पाकिस्‍तान के खिलाफ प्रदर्शन, बलोच कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग

बलूचिस्‍तान में पाकिस्‍तान की ज्‍यादतियों के खिलाफ पूरी दुनिया में आवाजें बुलंद होने लगी हैं। लंदन के 10 डाउन स्‍ट्रीट में शुक्रवार को बलूचिस्‍तान के लोग ब्रिटिश प्रधानमंत्री आवास के सामने जमा हुए और हजारों बलोच राजनीति कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए आवाज बुलंद की। बता दें कि बलूचिस्‍तान के लोग दशकों से खुद को पाकिस्‍तान के चंगुल से आजाद किए जाने की मांग कर रहे हैं।

पाकिस्‍तानी सेना ने बलूचिस्‍तान के लोगों के जीवन को नारकीय बना दिया है। पाकिस्‍तान से आजादी की मांग करने वाले हजारों राजनीति कार्यकर्ताओं को बंदी बना लिया गया है। पाकिस्‍तानी आर्मी से बचकर विदेशों में शरण लेने वाले हजारों बलूचिस्‍तानी लोग आए दिन पाकिस्‍तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और पाकिस्‍तानी जेलों में कैद हजारों राजनीति कार्यकर्ताओं की रिहाई की आवाज उठा रहे हैं।

बता दें कि पाकिस्‍तान ने बलूचिस्‍तान को आतंकवाद की फैक्‍ट्री बनाकर रखा हुआ है। बीते दिनों अमेरिका पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान उस वक्‍त फजीहत का सामना करना पड़ा था जब एक कार्यक्रम को संबोधित करते समय बलूचिस्तान समर्थकों ने इसके खिलाफ इमरान खान के सामने ही पाकिस्तान मुर्दाबाद के खिलाफ नारे लगाए थे।

बता दें कि पाकिस्तान ने POK पर भी अवैध कब्जा कर रखा है। अपनी भारत विरोधी नीतियों को लेकर उसने पूरे क्षेत्र को बदहाल और आतंकवाद की नर्सरी बना रखा है। सन 1947 के बाद से जम्मू-कश्मीर के भारत शासित भाग में लोकतांत्रिक व्यवस्था थी। जबकि पीओके का भाग जिसमें दो हिस्से (पहला गुलाम जम्मू और कश्मीर व दूसरा गिलगित-बाल्टिस्तान के क्षेत्र) थे, दोनों ही दिशाहीन रहे हैं। गुलाम कश्मीर के नेताओं ने उत्तरी क्षेत्र पाकिस्तान को अप्रैल 1949 में समझौते के तहत सौंप दिया था।

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